ग्रोथ सेंटरों को बाजार से जोड़ने पर जोर, मुख्य सचिव ने तय किया रोडमैप

by Blom

देहरादून। प्रदेश में स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित ग्रोथ सेंटरों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रोथ सेंटरों को मार्केट लिंकेज, निजी भागीदारी और आधुनिक भंडारण सुविधाओं से जोड़कर अधिक प्रभावी बनाया जाए।

बैठक में मुख्य सचिव ने सभी विभागों से संचालित ग्रोथ सेंटरों की कार्यप्रणाली और प्रगति की जानकारी लेते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका बढ़ाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने नियमित समीक्षा करने, बेहतर प्रदर्शन करने वाले ग्रोथ सेंटरों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने तथा बंद पड़े लेकिन संभावनाओं वाले ग्रोथ सेंटरों को दोबारा संचालित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रोथ सेंटरों में तैयार होने वाले उत्पादों को ट्रेसेबिलिटी, जीआई टैगिंग और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान मिल सके।

बैठक में उन्होंने शीप एंड वूल डेवलपमेंट बोर्ड को पशुपालकों के साथ नियमित संवाद और कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही अन्य राज्यों के सफल मॉडल का अध्ययन कर उन्हें उत्तराखंड में लागू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा।

उन्होंने ग्रोथ सेंटरों को कोल्ड स्टोरेज चेन से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि माइक्रो कोल्ड स्टोरेज विकसित होने से उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और बाजार की मांग के अनुरूप उचित समय पर बिक्री कर किसानों और उत्पादकों को बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि हाउस ऑफ हिमालयाज से जुड़े सभी विभागों की समन्वय बैठक जल्द आयोजित की जाए, ताकि उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को नई गति मिल सके। उन्होंने नाबार्ड को भी ग्रोथ सेंटरों की जरूरतों का आकलन कर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तथा वन विभाग (जेआईसीए) के ग्रोथ सेंटरों के लिए व्यवसायिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव कहकशां नसीम, आनन्द श्रीवास्तव, झरना कामठान सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद  रहे।

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